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आज डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह तथा प्रमोद ताम्बट का जनमदिन है

>> बुधवार, 27 जनवरी 2010


आज, 27 जनवरी को जीवन संदर्भ वाले डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह तथा व्यंग्य वाले प्रमोद ताम्बट का जनमदिन है।

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह का ईमेल आईडी bksrewa@gmail.com व प्रमोद ताम्बट का ईमेल आईडी ईमेल tambatin@gmail.com है।

बधाई एवं शुभकामनाएँ



12 बधाईयाँ:

Udan Tashtari 27 जनवरी 2010 को 6:36 am  

डॉ भूपेन्द्र और प्रमोद जी को जन्म दिन की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

अविनाश वाचस्पति 27 जनवरी 2010 को 7:22 am  

प्रमोद ताम्‍बट और भूपेन्‍द्र कुमार सिंह जी को जन्‍मदिन पर मंगलकामनायें। अच्‍छा अच्‍छा लिखें और हिन्‍दी जगत में धूम मचायें।

Kulwant Happy 27 जनवरी 2010 को 7:26 am  

जन्मदिन मुबारक हो।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi 27 जनवरी 2010 को 8:03 am  

डॉ भूपेन्द्र जी और प्रमोद जी को जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ।

शरद कोकास 27 जनवरी 2010 को 8:45 am  

भूपेन्द्र जी व प्रमोद जी को शुभकामनायें ।

Mithilesh dubey 27 जनवरी 2010 को 8:52 am  

डॉ भूपेन्द्र और प्रमोद जी को जन्म दिन की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ........

निर्मला कपिला 27 जनवरी 2010 को 10:27 am  

प्रमोद ताम्‍बट और भूपेन्‍द्र कुमार सिंह जी को जन्‍मदिन की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें

राजू मिश्र 27 जनवरी 2010 को 10:42 am  

भूपेन्द्र जी व प्रमोद जी को शुभकामनाएँ ।

प्रकाश गोविन्द 27 जनवरी 2010 को 11:22 am  

डॉ भूपेन्द्र जी
और
प्रमोद जी को
जन्म दिन की
बहुत -बहुत
बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

सुलभ 'सतरंगी' 27 जनवरी 2010 को 3:42 pm  

डॉ भूपेन्द्र जी और प्रमोद ताम्‍बट जी को जन्म दिन की बधाई एवं शुभकामनाएँ.

प्रमोद ताम्बट 28 जनवरी 2010 को 9:37 pm  

मेरे जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देने वाले सभी बंधु-बांश्वियों को अनेक धन्यवाद। डा. डंडा लखनवी जी ने एक कविता प्रेषित की है जो कि हुबहू पेश है:-

श्री प्रमोद ताम्बट जी! आपके जन्म दिन पर हार्दिक मंगलकामनाओं सहित........
नाटक में आप हीरो, साहित्य में विचारक ।
श्रीमान आपको हो यह जन्म दिन मुबारक ॥

क्या खूब आप उनको लेते निशाने पर हो,
अंजाम जो हैं देते घटना हृदय विदारक ॥

जो सामने है दिखता वह दुनिया जानती हैं,
पर्दे में छिपा है क्या, यह जानते सुधारक ॥

कहते हैं व्यंग्य जिसको वह एक सर्जरी है,
हाँ, व्यंग्यकार होता दुख-दर्द का निवारक ॥

इस लेखनी के आगे अणुबम भी कुछ न होते,
कर की कलम दिनों दिन बनती रहे प्रहारक ॥

"डंडा" की ये दुआ है, खुशहाल आप होवें,
हरगिज निकट आएं जो तत्त्व हानिकारक ॥

सद्भावी- डा0 डंडा लखनवी

अपनी शुभकामनाएँ दें

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